भविष्य निधियों से मान्यता प्राप्त कार्यों के लिए अन्तिम निष्कासन संबंधी आदेश।
दिनांक 13 नवम्बर, 1976
विषय: भविष्य निधियों से मान्यता प्राप्त कार्यों के लिए अन्तिम निष्कासन।
महोदय,
अधोहस्ताक्षरी को इस विभाग के उपरान्त लिखित कार्यालय ज्ञापों में जारी निर्देश की ओर ध्यान आकर्षित करने का निदेश हुआ है जिनके अन्तर्गत मकान निर्माण भूमि के खरीदने तथा उस पर मकान निर्माण के लिये, पुत्र के तथा पुत्री के विवाह के लिये तथा उच्च शिक्षा के लिए किसी अभिदाता के भविष्य निधि से अन्तिम निष्कासन करने देने तथा उसकी अधिकतम सीमा का प्राविधान किया गया है। इस स्थिति पर विचार किया गया है और यह अनुभव किया गया है कि उपर्युक्त कार्यों पर होने वाले व्यय में वृद्धि अधिक होने के कारण अभिदाता को उसके भविष्य निधि से दिया गया अन्तिम निष्कासन काफी नहीं होता है। इस प्रश्न पर पूर्ण विचार करने के पश्चात शासन ने यह निर्णय लिया है कि साधारणतया अभिदाता को भविष्य निधि से उसके भविष्य निधि से दिया गया। उसके जमा अंशदान तथा उस पर जो ब्याज की धनराशि के आधे भाग तक या अभिदाता के छः माह के वेतन तक इनमें से जो भी कम हो अन्तिम निष्कासन दिया जायेगा।
1- जी-2-985/दस-512-1952 दिनांक 1 मई, 1956 का पैरा 1(सी)
2- जी-2-2260/दस-512-1952 दिनांक 28 अगस्त, 1963 का पैरा 2(बी) तथा 4(ए)
3- जी-2-1289/दस-527-1955 दिनांक 1 दिसम्बर, 1960 का पैरा 1(3)
4- जी-2-3870/दस-527-1955 दिनांक 10, दिसम्बर, 1690 का पैरा 1(सी)
5- जी-2-3662/दस-512-1952 दिनांक 1 दिसम्बर, 1960 का पैरा 1(3)
विशेष परिस्थिति में सविकृत्ति करने वाले अधिकारी की यह क्षमता होगी कि उक्त रोकड़ अर्थात् अभिदाता के अंशदान तथा उस पर ब्याज की जमा धनराशि के तीन चौथाई अंश तक अन्तिम निष्कासन की अनुमति प्रदान कर दे। ऐसा करते समय स्वीकृत्त करने वाला अधिकारी प्रस्तावित अन्तिम निष्कासन के उद्दिष्ट प्रयोजन, अभिदाता की हैसियत तथा उसकी भविष्य निधि में जमा धनराशि पर समुचित ध्यान देगा।
अतिरिक्त आदेश:--
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