लापता सरकारी सेवकों को मृत मानते हुए उनके परिवार को उनके सेवा निवृत्तिक लाभों तथा अन्य अवशेषों का भुगतान।
विषय: लापता सरकारी सेवकों को मृत मानते हुए उनके परिवार को उनके सेवा निवृत्तिक लाभों तथा अन्य अवशेषों का भुगतान।
यदाकदा शासन के समक्ष ऐसे मामले आते हैं जिनमें सरकारी सेवक अपने सेवकाल में ही अचानक गुम हो जाते हैं और जिनका कोई पता ठिकाना मालूम नहीं होता है। भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 108 पर आधारित सिद्धांत के अनुसार जब तक किसी कर्मचारी के गुम हो जाने की तिथि से सात साल की अवधि व्यतीत नहीं होती तब तक उसे मृत नहीं समझा जा सकता है और उसके परिवार को सेवा निवृत्तिक प्रसुविधाओ का भुगतान नहीं किया जा सकता। ऐसी स्थिति में स्पष्ट है की संबंधित सरकारी सेवक के परिवार को कठिन आर्थिक स्थिति का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में राज्यपाल महोदय ने इस बिंदु पर सम्यक विचारोपरांत यह आदेश देने की कृपा की हैं कि (1) जब कोई कर्मचारी, परिवार को छोड़कर गुम हो जाता है तो उसके द्वारा किये गये नामितीकरण के आधार पर शुरू में उसके परिवार को उसे देय अवशेष वेतन, देय अवकाश का नकदीकरण तथा भविष्य निधि में उपलब्ध धनराशि का भुगतान किया जा सकता है। (2) एक साल की अवधि व्यतीत होने पर उसके परिवार के अन्य प्रसुविधायें जैसे पारिवारिक पेंशन/ सेवा एवं मृत्यु आनुतोषिक का भुगतान भी आगामी प्रस्तरों में निर्धारित शर्तों के पूरा करने पर किया जा सकता है।
2-- उपरोक्त प्रसुविधायें केवल निम्न औपचारिकताओं के पूर्ण करने पर ही अनुमन्य की जा सकती है--
(1) संबंधित सरकारी सेवक के परिवार ने संबंधित पुलिस थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर दी हो और पुलिस द्वारा इस आशय का प्रमाण पत्र दे दिया गया हो कि पुलिस द्वारा सभी प्रयास किये जाने के बाद संबंधित कर्मचारी को नहीं ढूँढा जा सका।
(2) संबंधित कर्मचारी के नामिनी/ आश्रितों द्वारा इस आशय का क्षतिपूर्ति बन्धपत्र (इंडेमिनिटी बांड) दे दिया गया हो कि यदि गुमशुदा कर्मचारी उपस्थित हो जयेग़ा और दावा करेगा तो कर्मचारी के देय भुगतानों में से उसके परिवार को दिये गये भुगतानों का समायोजन कर लिया जायेगा।
(3) संबंधित विभागाध्यक्ष/ कार्यालयाध्यक्ष संबंधित सरकारी सेवक के विरुद्ध निकल रहे शासकीय देयों के आगणन कर लेंगे और परिवार के देय विशेष अथवा सेवा निवृति के लाभों में से नियमानुसार उसकी वसूली करेंगे।
(4) पारिवारिक पेंशन एवं सेवा एवं मृत्यु आनुतोषिक की स्वीकृति के संबंध में वही प्रक्रिया अपनायी जायेगी जैसी उक्त प्रकार के सामान्य मामलों में अपनाई जाती है। अन्य अवशेषों के भुगतान के सम्बंध में सामान्य प्रक्रिया ही अपनायी जायेगी।
सोमदत्त त्यागी,
विशेष सचिव।
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