अस्थायी सरकारी सेवकों की सेवा निवृत्ति/मृत्यु पर पेंशनरी लाभों की अनुमन्यता के संबंध मे आदेश।
वित्त (सामान्य) अनुभाग-३
सं० सा०-3-1152/दस-915/89
लखनऊ : दिनांक 1 जुलाई, 1989
कार्यालय ज्ञाप
विषय: अस्थायी सरकारी सेवकों की सेवा निवृत्ति/मृत्यु पर पेंशनरी लाभों की अनुमन्यता।
महोदय,
उपर्युक्त विषय पर अधोहस्ताक्षरी को यह कहने का निदेश हुआ है कि सिविल सर्विस रेगुलेशन्स के अनुच्छेद 368 की व्यवस्था के अनुसार राज्य सरकार के अंतर्गत की गयी सेवा पेंशन हेतु तब तक अर्ह नहीं मानी जाती है तब तक कि सक्रकारी सेवक किसी पर स्थायी न हो गया हो। सरकारी सेवकों के यथा समय स्थायीकरण किये जाने हेतु शासन के विद्यमान आदेशों के बावजूद कुछ मामलों में प्रक्रिया सम्बन्धी अपेक्षायें पूरी न होने पाने के कारण, सम्बन्धित कर्मचारी स्थायी हुए बिना ही अधिवर्षता पर सेवा निवृत्त हो जाते हैं जिससे उन्हें पेन्शनीय लाभ, अनुमन्य नहीं हो पाते हैं।
2-- उपरोक्तानुसर अस्थायी रहते हुए सेवा निवृत्त हो जाने के कारण सरकारी सेवकों को होने वाली कठिनाइयों को दूर किये जाने का प्रश्न काफी समय से शासन के विचाराधीन रहा है और सम्यक विचारोपरान्त राज्यपाल महोदय ने सहर्ष यह आदेश प्रदान किये हैं कि ऐसे सरकारी सेवकों को जिन्होंने कम से कम 10 वर्ष की नियमित सेवा पूर्ण कर ली हो, अधिवर्षता पर सेवा निवृत्त होने अथवा सक्षम चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा आगे सेवा करने पूर्णतया अक्षम घोषित कर diye जाने पर अधिवर्षता अशक्त पेंशन सेवा निवृत्त ग्रेच्युटी तथा पारिवारिक पेंशन उसी प्रकार स्वयं उन्ही दरों पर देय होगी जैसी कि स्थायी कर्मचारियों को उन्हीं परिस्थितियों में संगत नियमों के अंतर्गत अनुमन्य होती है।
3-- यह व्यवस्था उन मामलों में भी लागू होगी जहाँ अस्थायी रहते हुए 20 वर्ष की सेवा पूर्ण करने अथवा 45 वर्ष की आयु पूर्ण करने, जो भी पहले हो, के उपरान्त मूल नियम 56 के अंतर्गत स्वेच्छया सेवा निवृत्त होने की अनुमति प्रदान की गयी हो।
4-- यह आदेश 1-6-1989 के लागू माने जायेंगे। उक्त दिनांक से पूर्व अस्थायी रहते हुए अधिवर्षता अशक्तता पर अथवा स्वेच्छया सेवा, निवृत्त हो चुके ऐसे कर्मचारियों के मामलों में जो उक्त दिनांक को जीवित हो, संगत व्यवस्थाओं के अंतर्गत मिल चुकी ग्रेच्युटी, यदि कोई हो, का कोई पुनरिक्षिण नहीं किया जायेगा। जिम मामलों में, संगत नियमों के अंतर्गत, कोई ग्रेच्युटी अनुमन्य नहीं थी उनमें इस कार्यालय ज्ञाप के अंतर्गत कोई ग्रेच्युटी अनुमन्य नहीं होगी। ऐसे सरकारी सेवकों को जो अस्थायी रहते हुए दिनांक 1-6-1989 के पूर्व सेवा निवृत्त हो चुके थे और जिन्हें उसके कारण कोई पेंशन अनुमन्य नहीं हुई थी, दिनांक 1-6-1989 से सेवा निवृत्त के पूर्व सेवा की अन्तिम दस मास की औसतन परिलब्धियों (दिनांक: 1-1-1986 के पूर्व सेवा निवृत्त कर्मचारियों के मामलों में औसत परिलब्धियों का आशय उस वेतन से है जो उन्हें मूल वेतन 9(21) के अन्तर्गत मिल रहा था तथा 1-1-1986 अथवा उसके उपरान्त के मामलों में परिलब्धियों का आशन उसक वेतन से है जो मूल नियम 9(21)(1) में परिभाषित है) के 50/ की दर से उस दशा में पेंशन अनुमन्य होगी जब सेवा निवृत्त के पूर्व उन्होंने 33 वर्ष की अर्हकारी सेवा पूर्ण कर ली हो। यदि अर्हकारी सेवा 33 वर्ष से कम रही हो तो पेंशन उसी अनुपात में कम हो जायेगी। इस प्रकार आगणित ऐसे कर्मचारियों की पेंशनों को जो दिनांक 1-1-1986 के पूर्व सेवा निवृत्त हो चुके थे वित्त विभाग द्वारा निर्गत शासनादेश संख्या: सा-4-1120/दस-87-301/1987 दिनांक 28-7-1987 के रेडी रिकनरी भाग-1 एवं भाग-2 जैसी स्थिति हो के अनुसार 608 मूल्य सूचकांक के बराबर महंगाई राहत का लाभ देते हुए पुनरीक्षित कर दिया जायेगा और दिनांक 1-6-1989 से पुनरीक्षित धनराशि का लाभ दिया जायेगा।
5-- इस कार्यालय ज्ञाप के अंतर्गत पेंशन का किसी ऐसे कर्मचारी को राशिकरण अनुमन्य नहीं होगा जो 31-5-1974 अथवा उसके पूर्व सेवा निवृत्त हुआ हो। यदि इस कार्यालय ज्ञाप के अंतर्गत किसी ऐसे कर्मचारी को पेंशन दी जाये जो 31-5-1974 के उपरांत सेवा निवृत्त हुआ हो तो उसे 1-6-1989 के उपरांत अगली जन्म तिथि के समय उसकी आयु के समस्त दर पर मूल पेंशन की धनराशि पर राशिकरण अनुमन्य होगा और उसकी पेंशन से कम की गयी धनराशि उसकी वास्तविक सेवा निवृत्त के दिनांक के 15 वर्ष के बाद रेस्टोर कर दी जायेगी।
6-- दिनांक 1-6-1989 अथवा उसके बाद सेवा निवृत्ति/ मृत्यु के जिन मामलों में उपर्युक्त व्यवस्था का लाभ दिया जाएगा, उन्मे कार्मिक अनुभाग-1 के शासनादेश संख्या 19-8-1980 कार्मिक-1 दिनांक 29-4-1980 के अंतर्गत आनुतोषिक का लाभ नहीं होगा।
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