अन्तर्जातीय विवाह तथा गोद लिये जाने के फलस्वरूप उत्पन्न ऐसी स्थिति में अनुसूचित जाति/ जनजाति के सदस्यों को अनुमन्य आरक्षण का लाभ।
शासनादेश संख्या- 22/39/1982-का० 2
दिनांक 17 मई, 1984
विषय: अन्तर्जातीय विवाह तथा गोद लिये जाने के फलस्वरूप उत्पन्न स्थिति में राज्याधीन सेवाओं में अनुसूचित जाति/ जनजाति के सदस्यों को अनुमन्य आरक्षण का लाभ।
महोदय,
मुझे कहने का निदेश हुआ है कि राज्याधीन सेवाओं में अनुसूचित जाति/ जनजाति के सदस्यों को अनुमन्य आरक्षण के परिप्रेक्ष्य में शासन के समक्ष यह प्र्श्न है कि अन्तर्जातीय विवाह करने अथवा गोद लेने के फलस्वरूप उत्पन्न परिवर्तित स्थिति में उक्त आरक्षण का लाभ अनुमन्य होगा या नहीं। इस प्रश्न का समुचित रूप से परीक्षण किया गया और विचारोपरांत शासन का निम्नवत मत बना है :
(1) यदि अनुसूचित जाति/ जनजाति की कोई स्त्री किसी स्वर्ण पुरुष से विवाह करती है तो उसे विवाह के उपरान्त भी पूर्व में अनुमन्य आरक्षण मिलता रहेगा।
(2) यदि कोई स्वर्ण स्त्री किसी अनुसूचित जाति/ जनजाति के पुरुष से विवाह करती है तो उस स्त्री को आरक्षण व्यवस्था के अन्तर्गत लाभ अनुमन्य नहीं होगा।
(3) गोद लिये जाने के फलस्वरूप संबंधित बच्चा गोद लेने वाले व्यक्ति की अपनी सन्तान स्वरूप हो जनता है। अत : यदि अनुसूचित जाति/ जनजाति का कोई व्यक्ति किसी सवर्ण बच्चे को नियमानुसार गोद लेता है तो उस बच्चे को आरक्षण व्यवस्था के अन्तर्गत लाभ अनुमन्य होगा।
2-- अनुसूचित जाति/ जनजाति प्रमाण-पत्र जारी करते समय उक्त स्थिति का ध्यान रखा जाना चाहिये। प्रश्नगत बिंदुओ के संबंध में भारत सरकार से प्राप्त निर्देशक बिंदुओ के उद्वरण भी मार्ग-दर्शनार्थ संलग्न है। कृपया अपने अधीन समस्त नियुक्ति प्राधिकारियो, विशेष रूप से जाति प्रमाण-पत्र जारी करने हेतु प्राधिकृत अधिकारियो को इससे अवगत कराने तथा इनका अनुपालन सुनिश्चित कराने का कष्ट करें।
भवदीय,
जी० पी० शुक्ल,
विशेष सचिव।
-min%20(1).png)